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Wednesday, December 2, 2015

➽ विनाशकाले विपरीत बुद्धि...

कल लखनऊ में यकायक मौसम की भीषण असहिष्णुता से भौचक रह गया... शाम चार बजे जाड़े की रात्रि 7 बजने का नज़ारा था... भीषण आंधी-तूफ़ान के बाद ओलों की तड़तड़ाहट और फिर तेज़ बारिश... सैकड़ों पेड़ धराशाई होने से शहर की बिजली घण्टों गुल... बेईमान मौसम की इस भीषण असहिष्णुता के दौरान पूरे यूपी में तड़ित-आघात से सात लोगों ने अपना जीवन-पदक ईश्वर को वापस कर दिया... बताते हैं कि लगातार प्रदूषण बढ़ने से फ़िज़ां में नैनो-कार्बन कणों की मोटी परत बनने के कारण मौसम की अनिश्चितता आगे भी बरक़रार रहेगी... गर्मी, सर्दी, बारिश सबकुछ अनिश्चित और विचित्र मौसमी घालमेल... कानपुर जैसा शहर नैनो-कार्बन परत की अगवानी में सबसे आगे है, जिसका असर लखनऊ तक रहेगा... तमिलनाडु की जनता मौसम की असहिष्णुता से सर्वाधिक त्रस्त है जहां दो सौ लोग बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं... 

दिल्ली जैसे महानगरों में भीषण प्रदूषण के कारण बच्चों-बड़ों में अस्थमा, एलर्जी, टीबी, नेत्र-विकार आदि व्याधियां तीव्र गति से बढ़ रही हैं... भविष्य में ढेरों अख़लाक़, रामभरोसे, बंता सिंह और उनकी भावी पीढ़ियां घिस-घिस कर जिएंगीं और तिल-तिल कर मरेंगीं... छोटे स्थानों से महानगरों को बेरोजगारों के पलायन गाँव और शहर दोनों का पर्यावरण बिगाड़ रहा है... अनियंत्रित आबादी से महानगरों के अनियोजित यातायात में भीषण वृद्धि भी प्रदूषण बढ़ाने के साथ ही रोज़ हज़ारों लोगों हताहत कर रही है... बढ़ती आबादी, बढ़ते प्रदूषण और उससे प्रभावित होने वाले भारतीय सभी धर्मों, समुदायों, जातियों, वर्गों और क्षेत्रों के हैं... 

लेकिन प्रदूषण नियंत्रण एक चुनाव जिताऊ मुद्दा नहीं है... बल्कि पर्यावरण रक्षा पर नियमों का सख़्त अमल तमाम वोट काट सकता है... पूरे समाज के लिए ज़हर बन चुके जानलेवा प्रदूषण के खिलाफ ना तो कोई मोमबत्ती जुलूस निकल सकता है और ना ही प्रगतिशील बुद्धिजीवियों की पुरस्कार-वापसी के लिए यह लाभकारी मुद्दा है... सेक्युलर-साम्प्रदायिक, आरक्षण बढ़ाओ-आरक्षण हटाओ जैसे शब्दों से जूझ रही भारतीय राजनीति और बौद्धिक जमात तो खुद ही मानसिक-बौद्धिक-सामाजिक प्रदूषण फैलाकर देश का पर्यावरण छिन्न-भिन्न करने की होड़ मचाये है... आमूल भ्रष्टाचार, सत्ता-सुविधा मूलक वोटतंत्र, भाई-भतीजावाद और मज़बूत लूटतंत्र से प्रदूषित भारत का आम समाज शायद ही किसी पर्यावरण-प्रदूषण से निपटने में सक्षम हो... हम अगली पीढ़ी को किसी भी कीमत पर अधिक से अधिक कमाने-जुटाने-हथियाने के अलावा कुछ सिखा भी नहीं पा रहे हैं...  शायद हमारी विनाशकाले विपरीत बुद्धि...  #‎संतासुर


#‎संतासुर‬



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