हे प्रभु ठाकुर राम चन्द्र सिंह जी सादर प्रणाम,
प्रभु, wish you very very Happy Birthday... प्रभु फेस-बुक पर आपका account बहुत ढूँढा लेकिन मिला नहीं, इसलिए हारकर यह खुला पत्र लिख रहा हूँ... आज अन्ना हजारे जी की बुद्धिजीवियों द्वारा की जा रही दुर्दशा को देख कर आपकी बहुत याद आ रही है... सुना है आपके Empire और Government में corruption बिलकुल नहीं था... मतलब किसी अन्ना हजारे की आवश्यकता नहीं थी और न ही बुद्धिजीवियों द्वारा उनकी फजीहत की...
प्रभु, सुना है कि उस जमाने पूरी सोसाइटी ही आदर्श हुआ करती थी और अयोध्या में लंका से लौटी फौज के वानर-भालुओं के लिए अलग से "आदर्श सोसाइटी" बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ी... प्रभु, आपके राज्य में तो न लोकपाल थे, न लेखपाल... वो आपका राज्य तो कामरेड वाले चीन की तरह विपक्ष-विहीन था... क़ानून व्यवस्था तो हनुमान जी ही ठीक कर रखे थे... लेकिन यहाँ तो अब मित्र-पुलिस है जिसको तो सिर्फ देख कर ही दैहिक, दैविक और भौतिक ताप काफी बढ़ जाता है...
प्रभु मुझे हमेशा ही मलाल रहेगा आपके समय mobile phone ना होने का... काश अगर मोबाइल होता तो महाराज दशरथ आपसे वनवास के दौरान भी बात करते रहते और वियोग में उनका प्राणांत शायद ना होता... एक बात और कि अगर मोबाइल होता तो अवश्य ही माता सीता रावन द्वारा अपहरण के दौरान आपको मिस-काल करतीं, नहीं तो कम से कम मैसेज तो भेज ही सकती थीं... इस प्रकार जटायु भाई की जान भी बच जाती और आपको माता सीता की खोज में पशु-पक्षियों से पूछते हुए जंगल-जंगल भटकना न पड़ता... न ही मारुतिनंदन को समुद्र फांद कर लंका जलानी पड़ती... उनकी पूंछ भी सुरक्षित रहती... और हाँ, आपके समय तो टू-जी घोटाले का भी खतरा नहीं था क्योंकि आप तो खुद ही असली वाले राजा थे ना कि मंत्रिमंडल में कोई नीरा ब्रांड राजा रखा था...
प्रभु, क्या आपको पता है कि जटायु का वंश भारत से लुप्त हो रहा है और वन्य जीव प्रेमी (PETA) इसके लिए आपके रावण से पंगे को वजह बता रहे हैं, खासकर लखन सिंह भैया को जिन्होंने modern gal कुमारी सूर्पणखा के Boy Friend बनने की बजाय उसकी नाक ही काट ली थी... अरे कुमारी सूर्पणखा ने लखन सिंह भैया को प्रोपोज ही तो किया था बस... अब सुना है कि महिला आयोग भी कुमारी सूर्पणखा वाले मामले को काफी गंभीरता से ले रहा है... प्रभु, हमें यह भी पता लगा है कि वो वानर-भालुओं से माता सीता की खोज करवाने और रावण के खिलाफ युद्ध में काम लेने के सिलसिले में भी वन्य जीव संरक्षण विभाग नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है... प्रभु, हमें विश्वस्त सूत्रों से पता चला कि शम्बूक वाले मामले की जांच भी CBI को देने के लिए आन्दोलन की तैयारी थी, लेकिन उत्तर प्रदेश में बहुजन सरकार बन जाने के बाद मामला कुछ दिनों के लिए दब गया लगता है...
प्रभु, अयोध्या वाला बवाल तो आपने देखा-सुना ही होगा.... आज के दिन जब आपने जन्म लिया होगा तो आपने खुद या महराज दशरथ ने सोचा भी न होगा कि पैदा होने वाली जगह को लेकर हज़ारों साल बाद भी इतना बवाल होगा.... पता होता तो महराज दशरथ भी उसी समय यूपी वाली बहन जी की तरह उस जगह एक परमानेंट स्मारक बनवा देते.... और पब्लिक ने इतना बवाल तो बाबर के समय भी नहीं किया होगा जितना भाजपा के कहने पर 1992 में...
प्रभु, एक बात जान लीजिये कि अगर भाजपा और विहिप बाबर के समय होते तो बाबर हाथ मलता रह जाता और अडवानी को तो जिन्दगी भर कोसता... प्रभु, वो भाजपा है न राम-राम कह के सत्ता में आयी तो रामलला का जीना हराम हो गया और जनता ने कह दिया कि तुम अब राम-राम नहीं आराम करो... बेचारे कल्याण के चक्कर में तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं... खैर 30 सितम्बर 2010 को हाईकोर्ट के फैसले के बाद उम्मीद है कि आपके पक्के आवास की व्यवस्था आने वाले वर्षों में शायद हो जाये... प्रभु लेकिन वो भाजपा को अब माफ़ भी कर दो न बेचारे आपसे भी ज्यादा दिन वनवास झेल चुके हैं... प्रभु जैसे आपने बाली को मारकर सुग्रीव का राजतिलक किया वैसे ही दूसरे दलों को हरवाकर अडवानी जी का राजतिलक कर दो ना प्लीज़... सिर्फ एक बार ही सही प्लीज़...
प्रभु, खैर तुसी ग्रेट हो, छा गए हो अक्खी दुनिया में... ये मीडिया वाले पत्रकार भैया आपसे बिना कुछ लिए-दिये ही आपका कई दिन कवरेज किये... प्रभु, आप जानते हैं कि इतना भारी-भरकम इंतजाम तो हमारी सरकार आपकी बर्थडे यानी राम नवमी पर भी नहीं करती, जितना हर साल 6 दिसंबर को...
प्रभु, वो क्षत्रिय संगठन वाले भी गर्व करने के लिए आपका नाम खूब भुना रहे हैं... वो अमर सिंह भैया हैं न वो पहले तो कृष्ण जी के खानदानियों के साथ फेविकोल की तरह लगे थे लेकिन फिर ऐसे उखड़े कि जैसे दूध में फिटकिरी... अमर भैया ने आपको तो वो सीडी दिखाई ही होगी... प्रभु, आप तो मर्यादा पुरोषोत्तम थे लेकिन ये आपके चेले हैं ना, ये आपकी जगह होते तो सोने की लंका जीतने के बाद सारा सोना स्विस बैंक भेज देते और वहां की जमीन पर हाईटेक सिटी बनवा कर बेंच लेते...
प्रभु, याद कीजिये लंका पर पुल बाँधने के पहले रामेश्वरम में समुद्र ने जब रास्ता देने में ढिठाई दिखाई थी तो आपने गुस्से में लखन सिंह भैया से धनुष-बाण माँगा था और समुद्र औकात में आ गया था... लेकिन अब फिर वो ढीठ हो गया है, पहले उसी जगह सुनामी लाया और अब तो जगह-जगह ला रहा है... अपना जल-स्तर भी बढ़ा रहा है... कुछ करिए न प्लीज़... और हाँ याद आया वो मनमोहन जी हैं ना वो आपका बनवाया रहा-सहा पुल करूणानिधि के कहने पर तुडवाने में लगे हैं, कहते हैं जहाज निकलने में आसानी होगी... प्रभु, अपने लेवल पर देखिएगा कि अबकी मनमोहन जी और करूणानिधि जी का ही जहाज लोकतंत्र के समुद्र में डूब जाए...
प्रभु, कुछ दिनों के लिए ज़रा हनुमान जी को अवकाश पर इण्डिया भेज दीजिये.... वो फ़िल्मी दबंग अबला मुन्नी को नाहक बदनाम करके कूल्हे नचा रहा है... एक बार असली दबंग की गदा पड़ेगी न, तो उसका कूल्हा परमानेंट घूम जाएगा.... और हाँ आपने देखा ही होगा कि हनुमान भक्त धोनी की सेना ने बल्ला-रूपी गदाओं और बाल-रूपी शिलाओं से प्रहार करके लंका की सेना को वानखेड़े के मैदान में किस तरह से परास्त किया.... यह आपको बर्थ डे गिफ्ट ही तो था....
प्रभु, आपका नाम तो परम सुख दाई है... मरने के बाद तो सत्य होता ही है... जिन्दा में भी कुर्सी तक दिला देता है... आप तो आप, जिनके नाम में राम लगा है उन तक ने समाज में बहुत सम्मान और प्रतिष्ठा पाई है... एम् जी रामचन्द्रन हों या राम बिलास पासवान, बाबू जगजीवन राम हों या एन0 राम, कांशीराम हों या एन टी रामाराव या रामधारी सिंह दिनकर या सत्यम वाले अपने रामालिंगा राजू आदि आदि... गांधी जी आपके बहुत गुण गाते थे और मरते-मरते भी आपका नाम ले रहे थे... प्रभु, युग प्रवर्तक डा0 बाबासाहब भीमराव रामजी आंबेडकर के पिता जी का नाम भी माननीय रामजी सकपाल था... बस सिर्फ माननीय रामराज जी आपके एक अन्य अवतार भगवान् बुद्ध जी से संभवत: ज्यादा प्रभावित होकर ही अपना नाम माननीय उदितराज रख लिए... तो क्या हुआ हमारे लिए तो आप सब भगवान् एक ही हो... प्रभु, फिलीस्तीन के रामल्ला नगर का नाम तो लगभग रोज़ ही अखबार में आता है... और वो फ़िल्मी गानों में तो आपका नाम सावन की बदरिया की तरह छाया है... याद कीजिये वो हरे राम हरे कृष्ण वाले देवानंद जी का गाना -- "देखो ऐ दीवानों ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम ना करो..." और वो बसंती भी तो रामगढ़ की ही थी जहां के कुत्तों को गब्बर गाली देता था... और वो गब्बरवा भी श्रीराम छाप खैनी खा-खा के ही तो पचास हजारी बना था...
प्रभु, कबीर दास को क्या कहें वो तो लिख के चले गए कि "राम मोरे पिय मैं राम की दुल्हनिया..." और ना जाने आपके बारे में क्या क्या लिखे हैं... आप तो ठहरे मर्यादा पुरुषोत्तम, हमें तो आप पर पूरा भरोसा है, लेकिन वो हाईकोर्ट जी विचार कर रहे हैं कि दुल्हे की शादी दुल्हे से और दुल्हन की शादी दुल्हन से हो सकती है क्या... कबीर जी को थोडा समझाइए प्लीज़... और फिर अगर कबीर जी की बातें माता सीता ने पढ़ लिया होता तो वो धोबी वाला मामला पलट सकता था...
प्रभु, वो बाबा तुलसीदास आपका "राम चरित मानस" क्या लिख गए, हम-सब की जान आफत में है... हर गली-मोहल्ले में जिस भक्त को देखो जब-तब बड़े-बड़े भोंपू लगा कर अखंड पाठ छेड़ देता है... मुन्नी बदनाम हुई और वो शीला वाली धुनों पर लोग आपके गुणगान में रात-रात भर गला फाड़ कर धर देते हैं... प्रभु, लेकिन हमारे मोहल्ले की दशहरे वाली रामलीला इस साल बंद हो गयी... असल में पिछले साल, कई सालों का बकाया ना मिलने पर अंत में बहुत युद्ध के बाद भी रावण जी ने मरने से मना कर दिया था... दरोगा जी के धमकाने पर रावण जी मर तो गए थे लेकिन इस साल उन्होंने लड़ाई करने से मना कर दिया...
प्रभु, और वो आपकी ससुराल यानी माता सीता के मायके बिहार में इधर कुछ ठीक-ठाक है... अब चारा पशु-पक्षी ही खाने लगे हैं... अरे वो कृष्ण जी के खानदानी थे ना, उन्होंने सब रबड़ी बना रखी थी... गोवर्धन पूजा वाले दिन भी गायों का चारा खा जाते थे...
प्रभु, आप अनंत हो और आपकी कथा भी, लेकिन मेरी लिखास अब ख़तम हो रही है... हे करुणानिधान, अंत में एक विनती है कि फेसबुक और ट्विटर पर प्लीज़ अपना प्रोफाइल ज़रूर बना लें, हम भक्तों को बड़ी सुविधा होगी... इन भाजपा वालों और पण्डे-पुजारियों की बजाय आपसे सीधा चैटिंग हो सकेगी... छोटा होने के कारण अपनी गलतियों लिए आपसे क्षमा पाना मेरा मौलिक अधिकार है... पुन: सादर प्रणाम...
आपका अवसरवादी चेला,
![]() |
| #संतासुर |



