लगता है बुढापे में अन्ना बेचारे ने फालतू का बवाल मोल ले लिया भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठा कर.... अब सभी चीज़ों की परवाह उन्हें ही करनी पड़ेगी मुद्दा चाहे कुछ भी हो..... अब भविष्य में भारत चीन के बीच अगर तनाव होता है तो उसके लिए भी बुद्धिजीवी पूछेंगे कि अब अन्ना क्या कर रहे हैं.....
आप ही बताईये गरीबों, ग्रामीणों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, बच्चों, छात्रों, नौजवानों, मजदूरों, किसानों, कामगारों, विकलांगों, बीमारों, भूखों, सर्वहारा आदि के लिए अन्ना क्या कर रहे हैं....??? क्या अन्ना को इनकी कोई चिंता है...??? बताइये-बताइये.....
बताइये-बताइये..... महंगाई, अशिक्षा, भुखमरी, बेरोज़गारी, साम्प्रदायिकता, जातिवाद, आतंकवाद, सूखा, बाढ़, अकाल, भूकंप, सुनामी आदि के खिलाफ अन्ना क्या कर रहे हैं...??? लगता है कि ज़रूर वो अमेरिका से मिले हुए हैं.....
भला बताइये जनाब टूटी सड़कों, नदारद बिजली, पानी की किल्लत, चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाओं की किल्लत, सर्वशिक्षा, मुफ्त शिक्षा, मुफ्त चिकित्सा, गरीबों के आवास, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खेतों की सिंचाई, सस्ते बीज और खाद, गन्ना किसानों, पशु-चारे, वृद्धावस्था पेंशन आदि के सम्बन्ध में अन्ना क्या कर रहे हैं...??? बताइये-बताइये.....
बताइये-बताइये..... अगर अन्ना यह सब नहीं कर सकते तो उनको क्या ज़रुरत थी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने की...??? क्या उन्होंने इनसे पूछा था....??? चलो अगर नहीं पूछा था तो एक बार इनकी राय तो ले ही लेते, भले न मानते.... कम से कम मीडिया के सामने ही एक बार अन्ना कह ही देते की उनकी सफलता में इन जनाब का ही योगदान है...
अन्ना पर तो मुकदमा चलना चाहिए और कड़ी से कड़ी सजा इन बुद्धिजीवियों से पूंछ कर दे जानी चाहिए.... बताइये-बताइये.... भाषाविदों का विश्लेषण है कि वह संघ की भाषा बोल रहे हैं.... अब बताइये वह अंगरेजी न सही तो हिंदी, मराठी या किसी और भाषा में नहीं बोल सकते क्या.... बताइये-बताइये.....
जय हो बुद्धिजीवियों की... जय हो कलम-कागज़ की..... जय हो की-बोर्ड और माउस की.... #संतासुर
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