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Wednesday, April 13, 2011

➽ राम जी की Happy Birthday पर उनको मेरी चिट्ठी...

हे प्रभु ठाकुर राम चन्द्र सिंह जी सादर प्रणाम,
             
            प्रभु, wish you very very Happy Birthday... प्रभु फेस-बुक पर आपका account बहुत ढूँढा लेकिन मिला नहीं, इसलिए हारकर यह खुला पत्र लिख रहा हूँ... आज अन्ना हजारे जी की बुद्धिजीवियों द्वारा की जा रही दुर्दशा को देख कर आपकी बहुत याद आ रही है... सुना है आपके Empire और Government में corruption बिलकुल नहीं था... मतलब किसी अन्ना हजारे की आवश्यकता नहीं थी और न ही बुद्धिजीवियों द्वारा उनकी फजीहत की...
  
            प्रभु, सुना है कि उस जमाने पूरी सोसाइटी  ही आदर्श हुआ करती थी और अयोध्या में लंका से लौटी फौज के वानर-भालुओं के लिए अलग से "आदर्श सोसाइटी" बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ी...  प्रभु, आपके राज्य में तो न लोकपाल थे, न लेखपाल... वो आपका राज्य तो कामरेड वाले चीन की तरह विपक्ष-विहीन था... क़ानून व्यवस्था तो हनुमान जी ही ठीक कर रखे थे... लेकिन यहाँ तो अब मित्र-पुलिस है जिसको तो सिर्फ देख कर ही दैहिक, दैविक और भौतिक ताप काफी बढ़ जाता है...
  
            प्रभु मुझे हमेशा ही मलाल रहेगा आपके समय mobile phone ना होने का... काश अगर मोबाइल होता तो महाराज दशरथ आपसे वनवास के दौरान भी बात करते रहते और वियोग में उनका प्राणांत शायद ना होता... एक बात और कि अगर मोबाइल होता तो अवश्य ही माता सीता रावन द्वारा अपहरण के दौरान आपको मिस-काल करतीं, नहीं तो कम से कम मैसेज तो भेज ही सकती थीं...  इस प्रकार जटायु भाई की जान भी बच जाती और आपको माता सीता की खोज में पशु-पक्षियों से पूछते हुए जंगल-जंगल भटकना न पड़ता... न ही मारुतिनंदन को समुद्र फांद कर लंका जलानी पड़ती... उनकी पूंछ भी सुरक्षित रहती...  और हाँ, आपके समय तो टू-जी घोटाले का भी खतरा नहीं था क्योंकि आप तो खुद ही असली वाले राजा थे ना कि मंत्रिमंडल में कोई नीरा ब्रांड राजा रखा था...
  
              प्रभु, क्या आपको पता है कि जटायु का वंश भारत से लुप्त हो रहा है और वन्य जीव प्रेमी (PETA) इसके लिए आपके रावण से पंगे को वजह बता रहे हैं, खासकर लखन सिंह भैया को जिन्होंने modern gal कुमारी सूर्पणखा के Boy Friend बनने की बजाय उसकी  नाक ही काट ली थी... अरे कुमारी सूर्पणखा ने लखन सिंह भैया को प्रोपोज ही तो किया था बस... अब सुना है कि महिला आयोग भी कुमारी सूर्पणखा वाले मामले को काफी गंभीरता से ले रहा है... प्रभु, हमें यह भी पता लगा है कि वो वानर-भालुओं से माता सीता की खोज करवाने और रावण के खिलाफ युद्ध में काम लेने के सिलसिले में भी वन्य जीव संरक्षण विभाग नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है...  प्रभु, हमें विश्वस्त सूत्रों से पता चला कि शम्बूक वाले मामले की जांच भी CBI को देने के लिए आन्दोलन की तैयारी थी, लेकिन उत्तर प्रदेश में बहुजन सरकार बन जाने के बाद मामला कुछ दिनों के लिए दब गया लगता है...
  
               प्रभु, अयोध्या वाला बवाल तो आपने देखा-सुना ही होगा.... आज के दिन जब आपने जन्म लिया होगा तो आपने खुद या महराज दशरथ ने सोचा भी न होगा कि पैदा होने वाली जगह को लेकर हज़ारों साल बाद भी इतना बवाल होगा.... पता होता तो महराज दशरथ भी उसी समय यूपी वाली बहन जी की तरह उस जगह एक परमानेंट स्मारक बनवा देते.... और पब्लिक ने इतना बवाल तो बाबर के समय भी नहीं किया होगा जितना भाजपा के कहने पर 1992 में...
  
               प्रभु, एक बात जान लीजिये कि अगर भाजपा और विहिप बाबर के समय होते तो बाबर हाथ मलता रह जाता और अडवानी को तो जिन्दगी भर कोसता... प्रभु, वो भाजपा है न राम-राम कह के सत्ता में आयी तो रामलला का जीना हराम हो गया और जनता ने कह दिया कि तुम अब राम-राम नहीं आराम करो... बेचारे कल्याण के चक्कर में तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं... खैर 30 सितम्बर 2010 को हाईकोर्ट के फैसले के बाद उम्मीद है कि आपके पक्के आवास की व्यवस्था आने वाले वर्षों में शायद हो जाये... प्रभु लेकिन वो भाजपा को अब माफ़ भी कर दो न बेचारे आपसे भी ज्यादा दिन वनवास झेल चुके हैं... प्रभु जैसे आपने बाली को मारकर सुग्रीव का राजतिलक किया वैसे ही दूसरे दलों को हरवाकर अडवानी जी का राजतिलक कर दो ना प्लीज़... सिर्फ एक बार ही सही प्लीज़...

               प्रभु, खैर तुसी ग्रेट हो, छा गए हो अक्खी दुनिया में... ये मीडिया वाले पत्रकार भैया आपसे बिना कुछ लिए-दिये ही आपका कई दिन कवरेज किये... प्रभु, आप जानते हैं कि इतना भारी-भरकम इंतजाम तो हमारी सरकार आपकी बर्थडे यानी राम नवमी पर भी नहीं करती, जितना हर साल 6 दिसंबर को...

               प्रभु, वो क्षत्रिय संगठन वाले भी गर्व करने के लिए आपका नाम खूब भुना रहे हैं... वो अमर सिंह भैया हैं न वो पहले तो कृष्ण जी के खानदानियों के साथ फेविकोल की तरह लगे थे लेकिन फिर ऐसे उखड़े कि जैसे दूध में फिटकिरी... अमर भैया ने आपको तो वो सीडी दिखाई ही होगी...  प्रभु, आप तो मर्यादा पुरोषोत्तम थे लेकिन ये आपके चेले हैं ना, ये आपकी जगह होते तो सोने की लंका जीतने के बाद सारा सोना स्विस बैंक भेज देते और वहां की जमीन पर हाईटेक सिटी बनवा कर बेंच लेते...

              प्रभु, याद कीजिये लंका पर पुल बाँधने के पहले रामेश्वरम में समुद्र ने जब रास्ता देने में ढिठाई दिखाई थी तो आपने गुस्से में लखन सिंह भैया से धनुष-बाण माँगा था और समुद्र औकात में आ गया था... लेकिन अब फिर वो ढीठ हो गया है, पहले उसी जगह सुनामी लाया और अब तो जगह-जगह ला रहा है... अपना जल-स्तर भी बढ़ा रहा है... कुछ करिए न प्लीज़...  और हाँ याद आया वो मनमोहन जी हैं ना वो आपका बनवाया रहा-सहा पुल करूणानिधि के कहने पर तुडवाने में लगे हैं, कहते हैं जहाज निकलने में आसानी होगी...  प्रभु, अपने लेवल पर देखिएगा कि अबकी मनमोहन जी और करूणानिधि जी का ही जहाज लोकतंत्र के समुद्र में डूब जाए...

               प्रभु, कुछ दिनों के लिए ज़रा हनुमान जी को अवकाश पर इण्डिया भेज दीजिये.... वो फ़िल्मी दबंग अबला मुन्नी को नाहक बदनाम करके कूल्हे नचा रहा है... एक बार असली दबंग की गदा पड़ेगी न, तो उसका कूल्हा परमानेंट घूम जाएगा.... और हाँ आपने देखा ही होगा कि हनुमान भक्त धोनी की सेना ने बल्ला-रूपी गदाओं और बाल-रूपी शिलाओं से प्रहार करके लंका की सेना को वानखेड़े के मैदान में किस तरह से परास्त किया.... यह आपको बर्थ डे गिफ्ट ही तो था....

                 प्रभु, आपका नाम तो परम सुख दाई है...  मरने के बाद तो सत्य होता ही है... जिन्दा में भी कुर्सी तक दिला देता है... आप तो आप, जिनके नाम में राम लगा है उन तक ने समाज में बहुत सम्मान और प्रतिष्ठा पाई है... एम् जी रामचन्द्रन हों या राम बिलास पासवान, बाबू जगजीवन राम हों या एन0 राम, कांशीराम हों या एन टी रामाराव या रामधारी सिंह दिनकर या सत्यम वाले अपने रामालिंगा राजू आदि आदि...  गांधी  जी आपके बहुत गुण गाते थे और मरते-मरते भी आपका नाम ले रहे थे...  प्रभु, युग प्रवर्तक डा0 बाबासाहब भीमराव रामजी आंबेडकर के पिता जी का नाम भी माननीय रामजी सकपाल था... बस सिर्फ माननीय रामराज जी आपके एक अन्य अवतार भगवान् बुद्ध जी से संभवत: ज्यादा प्रभावित होकर ही अपना नाम माननीय उदितराज रख लिए... तो क्या हुआ हमारे लिए तो आप सब भगवान् एक ही हो...  प्रभु, फिलीस्तीन के रामल्ला नगर का नाम तो लगभग रोज़ ही अखबार में आता है...  और वो फ़िल्मी गानों में तो आपका नाम सावन की बदरिया की तरह छाया है... याद कीजिये वो हरे राम हरे कृष्ण वाले देवानंद जी का गाना -- "देखो ऐ दीवानों ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम ना करो..." और वो बसंती भी तो रामगढ़ की ही थी जहां के कुत्तों को गब्बर गाली देता था... और वो गब्बरवा भी श्रीराम छाप खैनी खा-खा के ही तो पचास हजारी बना था...

                   प्रभु, कबीर दास को क्या कहें वो तो लिख के चले गए कि "राम मोरे पिय मैं राम की दुल्हनिया..." और ना जाने आपके बारे में क्या क्या लिखे हैं...  आप तो ठहरे मर्यादा पुरुषोत्तम, हमें तो आप पर पूरा भरोसा है, लेकिन वो हाईकोर्ट जी विचार कर रहे हैं कि दुल्हे की शादी दुल्हे से और दुल्हन की शादी दुल्हन से हो सकती है क्या...  कबीर जी को थोडा समझाइए प्लीज़... और फिर अगर कबीर जी की बातें माता सीता ने पढ़ लिया होता तो वो धोबी वाला मामला पलट सकता था...

                 प्रभु, वो बाबा तुलसीदास आपका "राम चरित मानस" क्या लिख गए, हम-सब की जान आफत में है... हर गली-मोहल्ले में जिस भक्त को देखो जब-तब बड़े-बड़े भोंपू लगा कर अखंड पाठ छेड़ देता है... मुन्नी बदनाम हुई और वो शीला वाली धुनों पर लोग आपके गुणगान में रात-रात भर गला फाड़ कर धर देते हैं...  प्रभु, लेकिन हमारे मोहल्ले की दशहरे  वाली रामलीला इस साल बंद हो गयी... असल में पिछले साल, कई सालों का बकाया ना मिलने पर अंत में बहुत युद्ध के बाद भी रावण जी ने मरने से मना कर दिया था... दरोगा जी के धमकाने पर रावण जी मर तो गए थे लेकिन इस साल उन्होंने लड़ाई करने से मना कर दिया...

                प्रभु, और वो आपकी ससुराल यानी माता सीता के मायके बिहार में इधर कुछ ठीक-ठाक है... अब चारा पशु-पक्षी ही खाने लगे हैं... अरे वो कृष्ण जी के खानदानी थे ना, उन्होंने सब रबड़ी बना रखी थी...  गोवर्धन पूजा वाले दिन भी गायों का चारा खा जाते थे...

                प्रभु, आप अनंत हो और आपकी कथा भी, लेकिन मेरी लिखास अब ख़तम हो रही है...  हे करुणानिधान, अंत में एक विनती है कि फेसबुक और ट्विटर पर प्लीज़ अपना प्रोफाइल ज़रूर बना लें, हम भक्तों को बड़ी सुविधा होगी... इन भाजपा वालों और पण्डे-पुजारियों की बजाय आपसे सीधा चैटिंग  हो सकेगी... छोटा होने के कारण अपनी गलतियों लिए आपसे क्षमा पाना मेरा मौलिक अधिकार है...  पुन: सादर प्रणाम...
आपका अवसरवादी चेला,
डी के बाजपेई #‎संतासुर‬


#‎संतासुर‬

Tuesday, April 12, 2011

➽ सर्वमंगल कारक कुर्सी माता की वंदना...

नवरात्री के समापन पर इस महामूर्ख नागरिक की ओर से  सर्व अवगुणहारिणी, सर्वमंगलकारिणी कुर्सी माता की वंदना...

या देवी सर्वदेशेशु कुर्सी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमोनम:..

सर्वे भवन्तु सांसद:, सर्वे सन्तु विधायक:,
सर्वे राजनेता भवन्तु, मा कश्चिद् मतदाता भवेत्...
  
सर्वे भवन्तु IAS, सर्वे सन्तु PCS,
सर्वे नौकरशाह भवन्तु, मा कश्चिद् जनता भवेत्...
  
सर्वे भवन्तु माफिया, सर्वे सन्तु ठेकेदार:,
सर्वे थानेदार: भवन्तु, मा कश्चिद् सज्जन: भवेत्...
  
सर्वे भवन्तु दलाल:, सर्वे सन्तु उद्योगपति:,
सर्वे सूदखोर: भवन्तु, मा कश्चिद् उपभोक्ता भवेत्...

सर्वे भवन्तु समाजवादी, सर्वे सन्तु बुद्धिजीवी,
सर्वे साहित्यकार:, भवन्तु, मा कश्चिद् पाठक: भवेत्...

कुर्सीव माताचपिता कुर्सीव, कुर्सीव बन्धुश्चसखा कुर्सीव,
कुर्सीव विद्याचद्रविणं कुर्सीव, कुर्सीव सर्वं ममदेव देव...

या देवी सर्वदेशेशु कुर्सी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमोनम:....    
या देवी सर्वदेशेशु ठेका रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमोनम:....
या देवी सर्वदेशेशु सत्ता रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमोनम:....

                   हे आदिशक्ति कुर्सी माता मैने पूरी नवरात्री भर अनाज नहीं खाया, सिर्फ कुछ दर्जन केले, कुछ किलो सेब, पपीते इत्यादि फल, शुद्ध देशी घी और खोये से निर्मित मिठाइयाँ, पनीर, काजू, मखाने, छुहारे, बादाम, पिस्ता इत्यादि ड्राई-फ्रूट ही दिन में कई बार निष्ठा पूर्वक खाता रहा... मैने देशी की बजाय विशुद्ध विदेशी का ही सेवन किया, वो भी उबले आलू और पनीर के साथ... नवरात्री भर की पूरी ऊपर की कमाई का आधा भाग सच्चाई और ईमानदारी के साथ आपके भंडारे में दे दिया... चार जगहों पर दुर्गा पूजा और दो जगह रामलीला का भरपूर चंदा भी दिया... आपकी मूर्ति के सामने चबिसो घंटे शुद्ध देशी घी का दीपक बुझने नहीं दिया... पूरे एक शो के बराबर अर्थात तीन-तीन घंटे रोज़ आपकी पूजा-पाठ और आरती की... पिछले आठ सालों से जागरण अपने पैसों से कराता हूँ... हवाई जहाज से हर साल आपके वैष्णो देवी दरबार भी जाता हूँ माते... माता मेरा ख्याल रखना... हे माते, आप तो हवाई जहाज ड्राइवर और झोला छाप अर्थशास्त्री को भी को प्रधान मंत्री बना सकती हो... आपकी कृपा हो तो तिहाड़ भी इंद्र का राज्य लगता है... माते, ये तेरा लाल क्या राजा, कलमानी, कनिमोझी, कोड़ा, हसन अली, करूणानिधि, पवार से भी बुरा है...बिगड़ी मेरी बना दे ओ कुर्सी वाली मैया...

                   हे शक्तिस्वरूपा कुर्सी रूपी माता, मैं अब नौकरशाह तो नहीं बन सकता इसलिए मुझे सांसद ही बना दो, नहीं तो विधायक ही... न हो सके तो सभासद ही बना दो और नहीं तो ग्रामप्रधान भी चलेगा... अगर माता कुछ भी संभव न हो तो पार्टी में ही कोई पद दिला दो, पार्टी प्रवक्ता भी चलेगा... हे माता मुझे जघन्य साहित्यकार ही बना दो या फिर जलवा फ़ेंक पत्रकार ही सही... 
                 हे सर्व अवगुणहारिणी, सर्वमंगलकारिणी माता अगर कुछ न संभव हो तो बुद्धिजीवी तो बना ही देना... #‎संतासुर‬


#‎संतासुर‬

➽ खुल गया अन्ना का पन्ना...

                  लगता है बुढापे में अन्ना बेचारे ने फालतू का बवाल मोल ले लिया भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठा कर.... अब सभी चीज़ों की परवाह उन्हें ही करनी पड़ेगी मुद्दा चाहे कुछ भी हो.....  अब भविष्य में भारत चीन के बीच अगर तनाव होता है तो उसके लिए भी बुद्धिजीवी पूछेंगे कि अब अन्ना क्या कर रहे हैं.....

                 आप ही बताईये गरीबों, ग्रामीणों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, बच्चों, छात्रों, नौजवानों, मजदूरों, किसानों, कामगारों, विकलांगों, बीमारों, भूखों, सर्वहारा आदि के लिए अन्ना क्या कर रहे हैं....??? क्या अन्ना को इनकी कोई चिंता है...??? बताइये-बताइये.....  

                बताइये-बताइये..... महंगाई, अशिक्षा, भुखमरी, बेरोज़गारी, साम्प्रदायिकता, जातिवाद, आतंकवाद, सूखा, बाढ़, अकाल, भूकंप, सुनामी आदि के खिलाफ अन्ना क्या कर रहे हैं...??? लगता है कि ज़रूर वो अमेरिका से मिले हुए हैं..... 

                भला बताइये जनाब टूटी सड़कों, नदारद बिजली, पानी की किल्लत, चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाओं की किल्लत, सर्वशिक्षा, मुफ्त शिक्षा, मुफ्त चिकित्सा, गरीबों के आवास, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खेतों की सिंचाई, सस्ते बीज और खाद, गन्ना किसानों, पशु-चारे, वृद्धावस्था पेंशन आदि के सम्बन्ध में अन्ना क्या कर रहे हैं...???  बताइये-बताइये..... 

              बताइये-बताइये..... अगर अन्ना यह सब नहीं कर सकते तो उनको क्या ज़रुरत थी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने की...???  क्या उन्होंने इनसे पूछा था....???  चलो अगर नहीं पूछा था तो एक बार इनकी राय तो ले ही लेते, भले न मानते....  कम से कम मीडिया के सामने ही एक बार अन्ना कह ही देते की उनकी सफलता में इन जनाब का ही योगदान है...

             अन्ना पर तो मुकदमा चलना चाहिए और कड़ी से कड़ी सजा इन बुद्धिजीवियों से पूंछ कर दे जानी चाहिए....  बताइये-बताइये.... भाषाविदों का विश्लेषण है कि वह संघ की भाषा बोल रहे हैं.... अब बताइये वह अंगरेजी न सही तो हिंदी, मराठी या किसी और भाषा में नहीं बोल सकते क्या.... बताइये-बताइये.....
जय हो बुद्धिजीवियों की... जय हो कलम-कागज़ की..... जय हो की-बोर्ड और माउस की....  #‎संतासुर‬


#‎संतासुर‬

Friday, April 1, 2011

➽ जीता तो भारत भी, भारत भी जीता है

बधाई हो भई बधाई हो

जीता है इंडिया भई इंडिया तो जीता है
जीता तो भारत भी, भारत भी जीता है 


इंडिया जो जीता है, जगमग में जीता है

बल्बों की रोशन कतारों में जीता है
भारत जो जीता अंधेरों में जीता है
आस्मां के रोशन सितारों में जीता है


इंडिया जो जीता है करतल में जीता है

पलकों में जीता है, मखमल में जीता है
भारत तो जीता है तिल-तिल के जीता है
गड्ढों, मैदानों में हिल-हिल के जीता है
तूफां में जीता है  लहरों में जीता है
भवरों में जीता, किनारों में जीता है


इंडिया जो जीता है, अरबों वो पायेगा 

सोना वो पायेगा, वैभव वो पायेगा
भारत जो जीता है, एक अरब ढोता है
राजा को ढोता, भिखारी को ढोता
कलमाड़ी ढोता, कबाड़ी को ढोता
खेल बिगाड़े वो खिलाडी भी ढोता
पवार को ढोता, बीमार को ढोता
हसन अली ढोता, गली-गली ढोता
बूढों को ढोता, अनाथों को ढोता
भ्रष्ट औ निकम्मों की बरातों को ढोता


इंडिया जो जीता तो शैम्पेन पीता है

पिजा वो खाता है, बर्गर वो खाता है
भारत जो जीता है रंजो-गम पीता है
ठर्रा भी पीता है, ताड़ी भी पीता है
कर्जे से पीता, दिहाड़ी से पीता है
सूखे निवालों संग अश्कों को पीता है
रोज़ जख्म पाता है, धोखा भी खाता है
चुल्लू भर पानी भी सीवर का पीता है 


इंडिया जो जीता है सड़क-सड़क जश्न हैं

भारत जो जीता है सभी तरफ प्रश्न हैं
इंडिया संपन्न है सुखी औ प्रसन्न है
भारत तो भूखा है, दुखी और विपन्न है


इंडिया तो जीता है कुछ एक मैदानों में

भारत तो जीता है खेतों-खलिहानों में
इंडिया तो व्यस्त है हुस्न और जवानी में
भारत तो पस्त है चाकरी, किसानी में 
इंडिया तो रमता है मालों और बारों में
भारत है बसता गली, नुक्कड़, चौबारों में
इंडिया है मस्त-मस्त झिलमिल फौव्वारों में
भारत है झूमता रिमझिम फुहारों में   
चमकता है इंडिया टीवी स्क्रीनों में
धड़कता है भारत खदानों, मशीनों में 


रंगीन शामों में इंडिया थिरकता है

स्याह सर्द रातों में भारत ठिठुरता है 
इंडिया तो जीता है जीत-हार, टॉस में
भारत तो जीता है जीने की आस में


इंडिया के सुख हैं तो भारत का दुखड़ा है

इंडिया तो भारत के जिगर का टुकड़ा है 
विभिन्नता में एकता, मात्र भारत में होता है


भारत महान है, वो इंडिया भी ढोता है

भौतिक है इंडिया तो भारत उसकी आत्मा
भारत के कण-कण में बसता है परमात्मा 
हमें एक आस है कि एक दिन आएगा
भारत और इंडिया, इक संग खिलखिलायेगा

जीता है इंडिया भई इंडिया तो जीता है
जीता तो भारत भी, भारत भी जीता है...     #संतासुर
जीता तो भारत भी, भारत भी जीता है 
#संतासुर