ऐ मेरे वतन के लोगों, चाहे जितना लगा लो नारा,
ये दुर्दिन हैं हम सबके, अब बचालो ये देश हमारा,
पर मत भूलो लाखों ने, है असमय प्राण गँवाए
(कुछ याद उन्हें भी कर लो)-2, (जो सदियों से गए हैं सताए)-2.
ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा चुल्लू में भर लो पानी,
जो लूट रहे हैं वतन को, उनकी नैय्या है डुबानी
जब आया इलेक्शन कोई, इक टिकट उन्होंने खरीदी,
जब तक थी साँस रहे काबिज, फिर लड़के को सीट दिला दी,
हर चुनाव जीतकर ये नेता, सो जाते ये फिर अभिमानी, जो लूट रहे हैं वतन को...
जब देश में इतनी गरीबी, वो भरते अपनी झोली,
स्विस बैंक में खोले खाते, वो लगाते देश की बोली,
हैं बड़े हैवान ये नेता, हैं बड़ी उनकी कारस्तानी, जो लूट रहे हैं वतन को...
कोई भ्रष्ट कोई चोर उचक्का, कोई धूर्त कोई घोटालाराशी,
चुनाव में लड़नेवाला, हर नेता है सत्यानाशी,
जो पैसा जमा स्विस बैंक में, वो पैसा है हिन्दुस्तानी, जो लूट रहे हैं वतन को...
जब कुर्सी उन्होंने पाई, वो भूल गए जनता को,
हरेक ने डकर के खाया, जनता का माल लुटाया,
जब चुनाव आया तो, कह रहे कि हम सेवक हैं,
वोट दे दो देश के वोटरों, हम फिर वादे करते हैं,
मत हो लोगों दीवाने, बन जाओ अब स्वाभिमानी, जो लूट रहे हैं वतन को...
तुम भूलो न उनके घोटाले, वर्ना करेंगे वो फिर मनमानी, जो लूट रहे हैं वतन को...
(जागो वोटर प्यारे... वोट ज़रूरी है देना)-2, जय वोट, जय लोक, जय हिंद l
विरचित : डी० के० बाजपेई (परम आलसी वोटर) #संतासुर
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