बजट सत्र के धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस में आज लोकसभा में दो ही चीज़ें दिखीं, पहली मनोरंजक और दूसरी दुःखद… काफी मनोरंजक था विकासाराम बापू का "दहला-पकड़" प्रवचन… और दूसरा दुःखद था विकासाराम बापू के प्रवचन से दबी-कुचली, दीन-दुःखी असहाय सी बैठी एक माँ का बुझा चेहरा, जिसका कुलदीपक "नेता सेलेक्शन कमीशन" की परीक्षा से ऐन पहले ही घर से कहीं भाग गया हो… विकासाराम बापू के धाराप्रवाह प्रवचन पर मगन भक्तों की गड़गड़ाती तालियां संसद के आँगन में पथराई सी आँखों से निहारती उस लाचार माँ के कलेजे पर मानो हथौड़े की तरह चोट कर रही थीं…
विकासाराम बापू ने एक बढ़िया अभिनय के साथ भावनाओं की चाशनी में लपेट कर विकास की मोटी-मोटी जलेबियाँ बनाने की अनुज्ञा प्राप्त करने हेतु देश के माननीयों से पेशेवर अपील की… उन्होंने विपक्ष से आज तक पुराने सभी भ्रष्टाचारों के मामले भुलाकर अब उनके साथ मिलजुल कर स्याह-सफ़ेद करने का आह्वान किया… मतलब साफ़, कि तुम तानाशाही में दो हमारा साथ, हम कर देंगे तुम्हारे पुराने पाप-गुनाह सब माफ़…
देश के माननीयों की परम-सभा में तालियां पीट-पीटकर विकासाराम बापू ने सभी निष्कर्मों को आत्म-पुराण से अभिसिंचित कर अपना विराट स्वरुप सुनाया… किसानों की जमीनें किसी भी तरह बिकवाने की चिंता में डबडबा आयी उनकी क्रूर-निष्ठुर आँखों से देश के पैसाखोर उद्योगपति तक रो पड़े… बापू ने पूरी ढिठाई से भ्रष्टाचार-नियंत्रण और जनलोकपाल पर कोई चर्चा नहीं की… दरअसल पुराने मौनी बाबा गिरोह से बेहतर विकसित भ्रष्टाचार हमारे गुजरात आश्रम के ईमानदार संत विकासाराम बापू का हिडेन एजेण्डा है…
विकासाराम बापू ने विदेश के कालेधन पर किये हवन-पूजन के लिए अपने सहयोगी स्वामी जेटलिम्बरम् की प्रशंसा की… लेकिन उन्होंने देश के अंदर समानांतर अर्थव्यवस्था चला रहे और मंहगाई बढ़ा रहे आंतरिक कालेधन पर "कॉर्पोरेट-चौथ" का व्रत-संयम रखा… आंतरिक कालेधन को घटाने और जब्त करने लिए कोई विधेयक लाने की बजाय वो भूमिअधिग्रहण अध्यादेश के जरिये रियलस्टेट में देशी कालाधन खपवाने हेतु आतुर दिखे… हे विकासाराम बापू, इस गरीब देश की भोली-भाली जनता सदियों से ही वचनों के नाम पर लच्छेदार प्रवचनों से ही तो लुटती रही है… एक बार और सही… #संतासुर
![]() |
| #संतासुर |

