प्रगतिशील और आधुनिक बनने के लिए आवश्यक है कि वैलेंटाइन डे को राष्ट्रीय महापर्व घोषित किया जाए… प्यार के क्षेत्र में पिछड़ापन दूर करने के लिए 100% एफडीआई घोषित की जाये… इस दिन पूरे हिन्दुस्तान में प्यार का सैलाब आना चाहिए, प्यार के अंधड़ चलने चाहिए… छूट होनी चाहिए कि इस दिन जो जिसको चाहे प्रोपोज़ करे, जहाँ मन हो लेकर टहले… हर वर्ष 14 फरवरी मनाने के लिए प्रत्येक गाँव, कस्बे और शहरों के मुहल्लों में घनी झाड़ियों युक्त बड़े-बड़े पार्क होने चाहिए… अगर जगहें कम पड़ें तो इस दिन सरकारों को सड़कों, खेतों, पगडण्डियों के किनारे कनातें वगैरह लगाकर आड़ बना देनी चाहिए ताकि वैलेंटाइनों के जत्थे एकांत में प्रेम-रस से भरपूर स्नान-ध्यान कर सकें… जगह-जगह चाकलेट, गुलाब, बुके और लव-गिफ़्ट की सब्सिडी वाली सरकारी दुकानें होनी चाहिए…
सभी प्रगतिशील आधुनिक माँओं-बापों को अपने बेटों-बेटियों को यह महापर्व झाड़ियों, सडकों, पार्कों, रेस्तराओं, रिजॉर्ट्स वगैरह में धूमधाम से मनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए… अपने सुपुत्रों-सुपुत्रियो को इस दिन के लिए भरपूर धन, वाहन, उपहार, भड़काऊ वस्त्रादि प्रदान करें… वैलेंटाइन अनुष्ठानों और कर्मकाण्डों के प्रति अगली पीढ़ी को शिक्षित और जागरूक करने के लिए वैलेंटाइन सप्ताह के समस्त कर्मकाण्ड कक्षा एक से ही स्कूलों में अनिवार्य किये जाएँ… सामाजिक पिछड़ापन दूर करने हेतु पांच साल के ऊपर के सभी बच्चों और युवाओं के लिए ब्वॉय अथवा गर्ल फ्रेण्ड होना अनिवार्य किया जाए… वैलेंटाइन डे के ख़ास-ख़ास विधि-विधानों को टीवी और डॉक्यूमेंटरी के ज़रिये दिखाकर पूरे देश में इसे मनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाना चाहिए…
अगले चुनावों में वैलेंटाइन डे और इससे सम्बंधित क्रियाओं-प्रक्रियाओं को चुनावी घोषणा-पत्रों में शामिल किया जाये… छिछोरेपन और प्यार के बीच का अंतर समाप्त करने के लिए सरकारों द्वारा विधेयक लाया जाए… वैलेंटाइन डे पर प्यार के प्रस्फुटन और प्रदर्शन के लिए विवाहितों को भी चिर-क्वाँरा माना जाए… प्यार होना ही काफी नहीं जब तक कि प्यार सार्वजनिक और भौतिक रूप से प्रदर्शित ना हो… इसलिए सम्पूर्ण भौतिक विधि-विधान से प्यार के सुगम सार्वजनिक मंचन के लिए सांस्कृतिक मंत्रालय के अधीन वैलेंटाइन विभाग खोला जाये… संत वैलेंटाइन को राष्ट्र-संत घोषित किया जाए… बदलते परिवेश में वैलेंटाइन कर्मकांडों और प्यार के तौर-तरीकों की अधिकाधिक खोजों के लिए यूजीसी द्वारा विश्वविद्यालयों में रिसर्च-सेल बनवाई जाएँ… बकौल मॉडर्न ख़बीरा --
"प्रेम व्हाट्सऐप ऊपजै, प्रेम एफबी पर दिखाय।
राजा परजा जेहि रुचै, झाड़ी मा लइ जाय।।" #संतासुर
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