आज गडकरी जी टीवी पर पूरी बेशर्मी से बता रहे थे कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाना इतना ज़रूरी था कि संसद-सत्र का इंतज़ार करना संभव नहीं था… गडकरी जी ने बताया कि अध्यादेश लागू होने से अब तक महाराष्ट्र में किसानों को दो हज़ार करोड़ का मुआवज़ा मिल चुका है…
भारत के हज़ारों साल के इतिहास में इतना परम-योग्य प्रधानमंत्री और इतनी काबिल सरकार शायद पहली बार आयी है जो विकास की गाड़ी की रफ़्तार बढ़ाने के नाम पर ट्रैफिक सिग्नल तोड़ते हुए पैदल मुसाफ़िरों को कुचलने पर आमादा है… गडकरी जी क्या आप बताएँगे --
1. गडकरी जी, देश-विदेश के उद्योगपति हमारी अधिकाँश कृषि योग्य ज़मीन खरीदने में सक्षम हैं… तो अगर उद्योगपति विकास के नाम पर पूरे देश की कृषि-योग्य भूमि का मुआवजा देने की योजना पेश करें तो क्या देश भर की उनकी मनपसंद कृषि-भूमि आप किसानों को मुआवज़ा देकर दिलवा देंगे…? ख़ैर आप तो खुद उद्योगपति हैं…
2. गडकरी जी, कृषि-उद्योग के अंतर्गत आधुनिक वैज्ञानिक-कृषि के नाम पर अगर उद्योगपति लाखों एकड़ कृषि-भूमि खरीदने की इच्छा करें तो क्या मुआवज़ा देकर उन्हें कृषि-भूमि लेने से आप या कोई अगली सरकार बदले हुए अपने क़ानून से रोक पाएंगे…?
3. गडकरी जी, सैकड़ों सालों से पुश्तैनी कृषि कर रहा किसान मुआवज़ा लेकर कौन सा रोज़गार करके रोटी कमायेगा…? या फिर वो अपने ही खेतों में होने वाले कंक्रीट निर्माणों में मज़दूरी करेगा…? क्योंकि मुआवज़े की धनराशि उसके परिवार का आजीवन भरण-पोषण नहीं कर सकती…
4. गडकरी जी, पीढ़ियों से और अपने जीवन में सिर्फ़ कृषक रहे किसी व्यक्ति के लिए क्या यह संभव है कि वह मुआवज़े में मिली लाखों अथवा करोड़ों रुपयों की धनराशि को सुरक्षित जगहों पर सुगम तरीकों से निवेश कर सके…? कर-मुक्त कृषि आय की जगह कर-युक्त आय के झमेलों के साथ ही अधिक आय के लालच में जमा-पूँजी के गँवा देने का खतरा सो अलग…
5. विकास और खुली अर्थव्यवस्था के नाम पर बढ़ते आयात से निपटने के लिए निर्यात बढ़ाना ज़रूरी है… कृषि-प्रधान देश होने के नाते तमाम कृषि उत्पाद हम निर्यात करते हैं… अंधाधुंध कृषि-भूमि अधिग्रहण से कृषि-उपज निर्यात तो दूर बल्कि कृषि भूमि घटने से शायद खाद्यान्न आयात बढ़ाना पड़े…
6. गडकरी जी, ग़रीबों को आवास देने के नाम पर भूमि-अधिग्रहण का बहाना आपकी दलालों की सरकार की धूर्तता मात्र है… दूर-दराज़ के गाँवों की कृषि-भूमि और खेतों पर गरीबों के लिए कौन मकान बनवायेगा और कौन सा गरीब उन्हें खरीदेगा…? दरअसल विदेशों से कहीं ज्यादा कालाधन देश के अंदर है, जिस पर आपकी सरकार पूरी मक्कारी से चुप है… और देश के अंदर का अधिकाँश कालाधन रियल-स्टेट में ही लगा है… जबकि ज़मीनों की आसमान छूती कीमतों की वजह से गरीब आदमी अपने मकान से महरूम है ना कि ज़मीनें कम होने से… सच तो यह है प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप के नाम पर भूमि अधिग्रहण करके आप अपनी हितैषी रियल-स्टेट कंपनियों को चुनाव जिताने का तोहफ़ा देना चाहते हो…?
गडकरी जी, न्यूनतम विनाश पर अधिकतम विकास सरकार का लक्ष्य होना चाहिए, ना कि सीमित विकास के लिए असीमित विनाश… फिलहाल भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर देश के पीएम की हठधर्मिता और हिटलरशाही से तो यही कि देश की जनता ने गलती से बन्दर के हाथ में उस्तरा पकड़ा दिया है… ख़ैर दिल्ली की जनता ने समय रहते गलती सुधार ली और यूपी-बिहार की जनता असेम्बली चुनाव में बंदरों को असेम्बली में घुसने नहीं देगी… #संतासुर
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| #संतासुर |

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