नवरात्री के समापन पर इस महामूर्ख नागरिक की ओर से सर्व अवगुणहारिणी, सर्वमंगलकारिणी कुर्सी माता की वंदना...
या देवी सर्वदेशेशु कुर्सी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमोनम:..
सर्वे भवन्तु सांसद:, सर्वे सन्तु विधायक:,
सर्वे राजनेता भवन्तु, मा कश्चिद् मतदाता भवेत्...
सर्वे भवन्तु IAS, सर्वे सन्तु PCS,
सर्वे नौकरशाह भवन्तु, मा कश्चिद् जनता भवेत्...
सर्वे भवन्तु माफिया, सर्वे सन्तु ठेकेदार:,
सर्वे थानेदार: भवन्तु, मा कश्चिद् सज्जन: भवेत्...
सर्वे भवन्तु दलाल:, सर्वे सन्तु उद्योगपति:,
सर्वे सूदखोर: भवन्तु, मा कश्चिद् उपभोक्ता भवेत्...
सर्वे भवन्तु समाजवादी, सर्वे सन्तु बुद्धिजीवी,
सर्वे साहित्यकार:, भवन्तु, मा कश्चिद् पाठक: भवेत्...
कुर्सीव माताचपिता कुर्सीव, कुर्सीव बन्धुश्चसखा कुर्सीव,
कुर्सीव विद्याचद्रविणं कुर्सीव, कुर्सीव सर्वं ममदेव देव...
या देवी सर्वदेशेशु कुर्सी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमोनम:....
या देवी सर्वदेशेशु ठेका रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमोनम:....
या देवी सर्वदेशेशु सत्ता रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमोनम:....
हे आदिशक्ति कुर्सी माता मैने पूरी नवरात्री भर अनाज नहीं खाया, सिर्फ कुछ दर्जन केले, कुछ किलो सेब, पपीते इत्यादि फल, शुद्ध देशी घी और खोये से निर्मित मिठाइयाँ, पनीर, काजू, मखाने, छुहारे, बादाम, पिस्ता इत्यादि ड्राई-फ्रूट ही दिन में कई बार निष्ठा पूर्वक खाता रहा... मैने देशी की बजाय विशुद्ध विदेशी का ही सेवन किया, वो भी उबले आलू और पनीर के साथ... नवरात्री भर की पूरी ऊपर की कमाई का आधा भाग सच्चाई और ईमानदारी के साथ आपके भंडारे में दे दिया... चार जगहों पर दुर्गा पूजा और दो जगह रामलीला का भरपूर चंदा भी दिया... आपकी मूर्ति के सामने चबिसो घंटे शुद्ध देशी घी का दीपक बुझने नहीं दिया... पूरे एक शो के बराबर अर्थात तीन-तीन घंटे रोज़ आपकी पूजा-पाठ और आरती की... पिछले आठ सालों से जागरण अपने पैसों से कराता हूँ... हवाई जहाज से हर साल आपके वैष्णो देवी दरबार भी जाता हूँ माते... माता मेरा ख्याल रखना... हे माते, आप तो हवाई जहाज ड्राइवर और झोला छाप अर्थशास्त्री को भी को प्रधान मंत्री बना सकती हो... आपकी कृपा हो तो तिहाड़ भी इंद्र का राज्य लगता है... माते, ये तेरा लाल क्या राजा, कलमानी, कनिमोझी, कोड़ा, हसन अली, करूणानिधि, पवार से भी बुरा है...बिगड़ी मेरी बना दे ओ कुर्सी वाली मैया...
हे शक्तिस्वरूपा कुर्सी रूपी माता, मैं अब नौकरशाह तो नहीं बन सकता इसलिए मुझे सांसद ही बना दो, नहीं तो विधायक ही... न हो सके तो सभासद ही बना दो और नहीं तो ग्रामप्रधान भी चलेगा... अगर माता कुछ भी संभव न हो तो पार्टी में ही कोई पद दिला दो, पार्टी प्रवक्ता भी चलेगा... हे माता मुझे जघन्य साहित्यकार ही बना दो या फिर जलवा फ़ेंक पत्रकार ही सही...
हे सर्व अवगुणहारिणी, सर्वमंगलकारिणी माता अगर कुछ न संभव हो तो बुद्धिजीवी तो बना ही देना... #संतासुर
![]() |
| #संतासुर |

No comments:
Post a Comment