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Saturday, June 6, 2015

➽ "टू मिनट इंस्टेंट जजमेंट"

सभी पक्षों को सुनते हुए अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि मैगी में लेड की मिलावट नेस्ले द्वारा कतई की नहीं गयी है… यह बात पश्चिम बंगाल, बिहार वगैरह की उत्कृष्ट प्रयोगशालाओं में नमूनों की जाँच से साबित होती है… जिन प्रयोगशालाओं ने मैगी के नमूनों में लेड होने की बात कही है, उन प्रयोगशालाओं के उच्चस्तरीय होने और वहां की जाँच मशीनों के निष्कर्षों की शुद्धता के बारे में बचाव पक्ष नेस्ले के विद्वान वकील साल्वे जी द्वारा संदेह व्यक्त किया गया है… इस संदेह के विरुद्ध अभियोजन पक्ष कोई साक्ष्य अथवा गवाह नहीं पेश कर सका…

पुन:, अगर मैगी के करोड़ों पैकेटों में कदाचित किसी एकाध पैकेट में रत्ती भर लेड होने का शुबहा है भी, तो वह लोकप्रिय कंपनी नेस्ले द्वारा किसी दूषित मंतव्य से नहीं किया गया साबित होता है… अपितु सरकारी लापरवाही से निरंतर बढ़ रहे वायु प्रदूषण के कारण वातावरण में मौजूद लेड के कण कुछ पैकेटों में पैकिंग करते समय स्वयं चले गए होंगे… मैगी देश के नौनिहालों तथा तमाम प्रगतिशील आधुनिक माँओं के लिए आधुनिक सतुआ जैसा व्यंजन है…  जनप्रिय मैगी पर रोक लगाना नागरिकों के "कुछ भी खाने के मौलिक अधिकार" पर रोक लगाना होगा… जनभावनाओं का आदर करते हुए यह अदालत मैगी वल्द मेसर्स नेस्ले पर लगे सभी अभियोग ससम्मान खारिज़ करती है… #‎संतासुर‬        

#‎संतासुर‬

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