जमात-ए-उलेमा- हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा है कि 'मैं यह बात पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं कि मुस्लिमों के लिए भारत से बेहतर कोई देश नहीं हो सकता।' मौलाना मदनी ने आतंकवाद के मुद्दे पर कहा कि 'बेकसूर लोगों को मारना कहीं से भी न्यायपूर्ण नहीं है।' मौलाना मदनी के अनुसार आतंकवाद की निंदा बिना 'किंतु और परंतु' के होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक कुछ देश आतंकवादियों को शरण देना बंद नहीं कर देते तब तक यह समस्या मौजूद रहेगी। फ्रांस के पेरिस में आईएस के हमले के बाद आतंकवाद के विरोध में कल देश के 75 शहरों में मुसलमान प्रदर्शन करेंगे।
मैं एक गैर-मुस्लिम भारतीय नागरिक होने के नाते माननीय मौलाना महमूद मदनी जी के इस बयान का तहेदिल से ख़ैरमक़्दम करता हूँ… उनकी इस बेहतरीन सोच और दर्शन का इस्तिक़बाल, हार्दिक नमन, वंदन अभिनन्दन करता हूँ… ज़नाब मदनी जी, सच बताऊँ तो एक हज़ार सालों से साथ-साथ रहते आये एक दूसरे के सुख-दुःख के साक्षी भारतीय हिन्दू और मुसलमान दोनों कौमों को एकसाथ रहने-जीने की आदत पड़ गयी है… आधुनिक हिन्दुस्तान दोनों में से किसी भी एक कौम के बिना अधूरा है… अगर बाहर की ज़हरीली मज़हबी हवाएँ यहां ना आएं और वोटबैंक बनाने की मज़बूरी ना हो तो पूरी दुनिया के लिए हमारा सतरंगी हिन्दुस्तान कौमी एकता की यूनिवर्सिटी है… रहीम, रसखान, खुसरो, जायसी जैसे मुस्लिम भारतीयों वाला हमारा हिन्दुस्तान का दरियादिल हिंदुत्व, सूफ़ियाना इस्लाम, वतनपरस्त हिन्दू-मुसलमान और हमारी सांझी गंगा-जमनी तहज़ीब समूची दुनिया के लिए एक अनुकरणीय नज़ीर है…
मुस्लिम वोटों की सियासत ही हिन्दू कट्टरवादियों को पनपने का मौक़ा देती है… वर्ना आम हिन्दू जब देश के मज़हबी बंटवारे के समय कट्टर हिन्दुत्ववाद का समर्थक नहीं रहा तो अब क्या होगा… हमारा पडोसी एकमात्र हिन्दू-राष्ट्र नेपाल हिन्दू जनता के बहुमत से आज एक सेक्युलर राष्ट्र बन चुका है… लेकिन हिन्दुस्तान में इसके विरोध में कहीं कोई उन्माद नहीं हुआ… जबकि लेबनान और फ़लस्तीन के लिए यहां का हिन्दू अपने मुस्लिम भाइयों के साथ राजनीतिक मोमबत्ती जुलूस में शामिल होता है… बर्मा के रोहिंगिया मुसलामानों के समर्थन में उन्मादी जुलूस निकाले जाते हैं… और अगर कोई व्यक्ति उत्पीड़ित पाकिस्तानी हिन्दुओं, निर्वासित कश्मीरी पंडितों, बेबस यज़ीदियों, अधिकारहीन मधेशियों के लिए सहानुभूति भी व्यक्त कर दे तो समाजवादी फूहड़े-आज़म जैसे लम्पट उसे भगवा-दल का घोषित कर देते हैं… ज़नाब मदनी साहब, हमें उम्मीद है कि तबेले-आज़म जैसे समाजवादी कलंक और जनवादी-बकवादी-अवसरवादी राजनीतिक दलों के लम्पट भी आपसे कुछ नसीहत लेंगे… एक बार फिर तहे दिल से शुक्रिया ज़नाब मौलाना महमूद मदनी…
बक़ौल अल्लामा इक़बाल --
यूनान मिस्र रोमां सब मिट गए जहां से
फिर भी मगर है बाकी नामोनिशां हमारा,
कोई बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा।।
मैं एक गैर-मुस्लिम भारतीय नागरिक होने के नाते माननीय मौलाना महमूद मदनी जी के इस बयान का तहेदिल से ख़ैरमक़्दम करता हूँ… उनकी इस बेहतरीन सोच और दर्शन का इस्तिक़बाल, हार्दिक नमन, वंदन अभिनन्दन करता हूँ… ज़नाब मदनी जी, सच बताऊँ तो एक हज़ार सालों से साथ-साथ रहते आये एक दूसरे के सुख-दुःख के साक्षी भारतीय हिन्दू और मुसलमान दोनों कौमों को एकसाथ रहने-जीने की आदत पड़ गयी है… आधुनिक हिन्दुस्तान दोनों में से किसी भी एक कौम के बिना अधूरा है… अगर बाहर की ज़हरीली मज़हबी हवाएँ यहां ना आएं और वोटबैंक बनाने की मज़बूरी ना हो तो पूरी दुनिया के लिए हमारा सतरंगी हिन्दुस्तान कौमी एकता की यूनिवर्सिटी है… रहीम, रसखान, खुसरो, जायसी जैसे मुस्लिम भारतीयों वाला हमारा हिन्दुस्तान का दरियादिल हिंदुत्व, सूफ़ियाना इस्लाम, वतनपरस्त हिन्दू-मुसलमान और हमारी सांझी गंगा-जमनी तहज़ीब समूची दुनिया के लिए एक अनुकरणीय नज़ीर है…
मुस्लिम वोटों की सियासत ही हिन्दू कट्टरवादियों को पनपने का मौक़ा देती है… वर्ना आम हिन्दू जब देश के मज़हबी बंटवारे के समय कट्टर हिन्दुत्ववाद का समर्थक नहीं रहा तो अब क्या होगा… हमारा पडोसी एकमात्र हिन्दू-राष्ट्र नेपाल हिन्दू जनता के बहुमत से आज एक सेक्युलर राष्ट्र बन चुका है… लेकिन हिन्दुस्तान में इसके विरोध में कहीं कोई उन्माद नहीं हुआ… जबकि लेबनान और फ़लस्तीन के लिए यहां का हिन्दू अपने मुस्लिम भाइयों के साथ राजनीतिक मोमबत्ती जुलूस में शामिल होता है… बर्मा के रोहिंगिया मुसलामानों के समर्थन में उन्मादी जुलूस निकाले जाते हैं… और अगर कोई व्यक्ति उत्पीड़ित पाकिस्तानी हिन्दुओं, निर्वासित कश्मीरी पंडितों, बेबस यज़ीदियों, अधिकारहीन मधेशियों के लिए सहानुभूति भी व्यक्त कर दे तो समाजवादी फूहड़े-आज़म जैसे लम्पट उसे भगवा-दल का घोषित कर देते हैं… ज़नाब मदनी साहब, हमें उम्मीद है कि तबेले-आज़म जैसे समाजवादी कलंक और जनवादी-बकवादी-अवसरवादी राजनीतिक दलों के लम्पट भी आपसे कुछ नसीहत लेंगे… एक बार फिर तहे दिल से शुक्रिया ज़नाब मौलाना महमूद मदनी…
बक़ौल अल्लामा इक़बाल --
यूनान मिस्र रोमां सब मिट गए जहां से
फिर भी मगर है बाकी नामोनिशां हमारा,
कोई बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा।।
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