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Saturday, December 13, 2014

➽ हरियाणा का रामपाल अंदर, दिल्ली का शाही इमामपाल सिकंदर…?

                       संत रामपाल तो अंट-शंट उगलकर देशद्रोह के आरोप में शंट हो गए… अब परम संत बुख़ारी को देश बांटने का बुखार चढ़ गया है…  हिन्दुस्तान ना हो गया बुखारी के बाप की जागीर हो गया… सच तो यह है कि देश को बांटने की धमकी देने वालों को चौराहे पर लटकाकर कई टुकड़ों में बाँट देना चाहिए… यूंकि इस देश में कुछ भी बोलने की आज़ादी है और पकड़े जाने पर माफ़ी ही काफ़ी है… गोया मुल्क ना हो गया बीएसएनएल का रिटायर्ड खम्भा हो गया, कोई भी कुत्ता आये और टांग उठाकर आचमन करके चला जाये… भई वाह…

                  दरअसल वोट बैंक की राजनीति के कारण ही बुखारी जैसे राष्ट्रीय बुखार सत्ता की मलाई खाकर देश को ही काटने दौड़ रहे हैं…  वर्ना तमाम वारंट होने के बावजूद, तमाम बार देशद्रोही जहर उगलने के बावजूद, तमाम आर्थिक/आपराधिक आरोप होने के बावजूद कोई भी सत्तारूढ़ दल इस मगरूर को गिरफ़्तार करने से घबराता रहा है… यदि कोई धर्मगुरु अपराधिक कृत्य करता है, सामाजिक घृणा फैलाता है, उसके कृत्य या वक्तव्य राष्ट्रद्रोही हैं तो उसे अविलम्ब कानून के हवाले करने चाहिए, चाहे वह किसी भी धर्म का, किसी भी स्तर धर्मगुरु हो…

                      परन्तु विडम्बना है कि इस धर्म-निरपेक्ष देश में आपराधिक कृत्यों, सम्भाषणों, कदाचार, दुराचार अथवा राष्ट्रद्रोह में गिरफ्तार होने वाले अधिकाँश धर्मगुरु एक धर्म-विशेष के ही होते हैं… भ्रष्टाचार और अराजकता से लबालब इस आस्थावान देश में बाकी सभी धर्मों में कोई भी धर्माचार्य या धर्मगुरु ठग, बेईमान, गड़बड़ नहीं है...  लगता तो ऐसा है कि सिर्फ एक धर्म विशेष के पूजा-स्थल ही गड़बड़ हैं और अकूत सम्पदा वाले हैं, जबकि बाकी सारे धर्मों की धार्मिक संस्थाएं कंगाल और पाक-साफ़ हैं…

                   धर्म-निरपेक्षता के नाम पर यह वोट बैंक की राजनीति ही देश में बढ़ रहे राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए जिम्मेदार है… ख़ास तौर पर लालू, मुलायम, नितीश, ममता जैसे सत्ता-लोलुपों की जाति-धर्म आधारित गंदी राजनीति से केवल एक मज़हब के अपराधी तत्वों को संरक्षण मिल रहा है, बल्कि प्रतिक्रिया में दूसरे धर्म के अतिवादियों/ कट्टरपंथियों को खेलने के अवसर भी मिल रहे हैं… और इन भ्रष्ट राजनेताओं और लालची धर्माचार्यों के कुकर्मों का खामियाजा झेलती है देश के सभी धर्मों-जातियों की वास्तविक आम जनता…  #‎संतासुर‬

#‎संतासुर‬


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